यदि खरीद गरंटी कानून लागू होता तो धान की लूट नहीं होती:श्यामसिंह

यदि खरीद गरंटी कानून लागू होता तो धान की लूट नहीं होती:श्यामसिंह
By NIRMAL SANDHU

26 की महापंचायत और 27 के भारतबंद को सफल बनाने की रणनीति बनाई
इन्द्री:तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने को लेकर चल रहे किसान आंदोलन को तेज करने के लिए 27 सितम्बर के भारतबंद को सफल बनाने और 26 सितम्बर को पानीपत की अनाज मंडी में भारी संख्या में किसानों को ले जाने के लिए इंद्री अनाज मंडी स्थित किसान भवन में भाकियू पदाधिकारियों की बैठक कर रणनीति बनाई। इस बैठक में जोरदार नारेबाजी कर सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रोश जताया गया। बैठक में किसान नेताओं ने संयुक्त किसान मोर्चा के निर्देश के अनुसार किसान आंदोलन को तेज करने का आहवान किया। बैठक के बाद किसान अनाज मण्डी में पहुंचे और धान की सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों की लुटाई होने के आरोप लगाएं। किसानों ने धान की सरकारी खरीद 25 सितम्बर से शुरू न होने पर बड़ा आंदोलन छेडऩे की चेतावनी दी। किसानों ने मण्डी में बदइंतजामों के लिए सरकार व अधिकारियों की तीखी आलोचना की।
भारतीय किसान यूनियन के युवा विंग के जिला प्रधान नरेन्द्र धूमसी ने कहा कि संयुक्त मोर्चा के निर्देश पर 27 तारीख को भारत बंद को सफल बनाए तथा 26 सितम्बर को पानीपत की अनाज मंडी में किसान महापंचायत में भारी संख्या में किसान पहुंचेंगे।
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष यशपाल राणा ने कहा किसान लगभग 10 महीने से दिल्ली की सीमाओं को घेर कर आंदोलन कर रहे हैं। किसान नेता सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं करती व एमएसपी पर गारंटी कानून नहीं बनाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि सभी आंदोलन को सफल बनाने के लिए एकता का परिचय दें। यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, पूरे किसान वर्ग का है। अगर यह कृषि कानून लागू होते हैं तो इससे किसान पूर्ण रूप से बर्बाद हो जाएगा और चंद लोगों की कठपुतली बनकर रह जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन के संगठन मंत्री श्याम सिंह मान ने कहा कि भाजपा सरकार किसान विरोधी है जिसका प्रमाण किसानों को मिल रहा है। मांगों को लेकर 10 महीने से किसान बार्डरों पर बैठे आंदोलन कर रहे, लेकिन सरकार किसानों की सुनने की बजाय गुंगी बहरी हुई बैठी है। किसान आंदोलन के लिए सरकार पूर्ण रूप से जिम्मेदार है। लोकतंत्र में आंदोलन व अपनी आवाज उठाने का सभी को अधिकार है। किसान आंदोलन की वजह से आमजन को हो रही परेशानी के सवाल पर उन्होंने कहा कि आंदोलन के लिए सरकार जिम्मेदार है। किसान आंदोलन नहीं करना चाहते लेकिन उन्हें मजबूर किया गया है। रास्ते किसानों ने नहीं, सरकार ने रोके हुए है। कहां है एमएसपी थी, है और रहेगी कहने वाले, क्योंकि अनाज मण्डियों में रोजाना हजारों क्विंटल धान आ रही है, लेकिन धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी 300 रूपए प्रतिक्विंटल कम रेट पर भी खरीददारी की जा रही है। इसके बाद भी खरीददार धान खरीदने से इंकार कर रहे हैं। धान खरीद न होने से मण्डियों में बरसात के कारण धान भीग रही है। सरकारी खरीद न आने के कारण धान के प्राईवेट खरीददार किसानों की धान को मनमाने रेट पर खरीदने में भी नखरें कर रहे हैं। यदि सरकार नेे 25 सितम्बर से सरकारी खरीद शुरू नहीं की तो आंदोलन छेड़ा जाएगा। सरकार व आढ़तियों और राईसमिलर्स के मिलकर किसानों को लुटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि खरीद गारंटी कानून लागू बना होता तो किसानों को कम रेट पर फसल की लूट नहीं होती। तीन कृषि कानूनों से किसानों को ही नहीं, किसानों से जुड़े सभी वर्ग के लोगों को नुकसान होगा।