Karnal-50 दुकानदारों को किराया चुकाने के नोटिस दे दिए हैं, जिनकी तरफ लाखों रूपये का किराया बकाया

[1/11, 7:53 PM] NIRMAL SANDHU: फोटो समाचार।

वर्षों से नगर निगम की दुकानो का किराया न चुकाने वाले दुकाने होंगी सील, 50 डिफाल्टरों को दिए नोटिस, 7 ने चुकाया किराया, शेष के पास एक सप्ताह की मोहल्लत, अन्यथा होंगी दुकाने सील-निगम आयुक्त डॉ. मनोज कुमार।

करनाल 11 जनवरी, वर्षों से नगर निगम की दुकानो का किराया न चुकाने वाले दुकानदारों के खिलाफ दुकाने सील करने जैसी कार्रवाई के लिए नगर निगम सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। मंगलवार को निगम आयुक्त डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि फिलहाल नगर निगम द्वारा ऐसे 50 दुकानदारों को किराया चुकाने के नोटिस दे दिए हैं, जिनकी तरफ लाखों रूपये का किराया बकाया है। उन्होंने बताया कि नोटिस सर्व होने के बाद 7 दुकानदारों ने नगर निगम में आकर दुकानो का किराया चुका दिया, लेकिन 43 ने अभी किराया चुकाने को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब सप्ताहिक नोटिस के बाद इनकी दुकाने सील करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए तैयारी कर ली गई है और उपायुक्त करनाल को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के लिए अनुरोध पत्र भेज दिया गया है।

निगमायुक्त ने आगे बताया कि नगर निगम एक स्थानीय निकाय है। दुकानो का किराया, प्रॉपर्टी टैक्स और विकास शुल्क जैसे स्त्रोतों से निगम की आय होती है, जो ज्यादातर शहर के विकास पर ही खर्च होती है। ऐसे में जो दुकानदार अपनी दुकानो का वाजिब किराया समय पर नहीं चुकाते और सालों तक न चुकाकर डिफाल्टर हो जाते हैं, उनके खिलाफ नगर निगम सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। उन्होंने बताया कि किराए की बात करें, तो 50 दुकानदारों की तरफ करीब 80 लाख रेंट की रकम बकाया है, जिन 7 लोगों ने नोटिस के बाद नगर निगम में रेंट जमा करवाया, वह करीब 15 लाख रूपये है।

उन्होंने बताया कि 43 डिफाल्टरों ने यदि एक सप्ताह में किराया चुकाने को लेकर रूचि नहीं दिखाई, तो आगामी 20 जनवरी को रिकवरी ऑफ एरियर ऑफ लैंड रिवेन्यू यानि भू-राजस्व के अधीन क्षेत्र की वसूली के तहत दुकाने सील करने जैसी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यही नहीं सील करने के बाद भी यदि सम्बंधित दुकानदार किराया नहीं चुकाता तो, दुकान खाली करवाकर उसकी पुन: बोली लगाई जाएगी।

डिफाल्टर हो चुकी दुकानो के यह हैं नम्बर- निगमायुक्त ने बताया कि जो दुकानदार दुकानो का रेंट समय पर जमा करवाने के कारण डिफाल्टर हो चुके हैं, उनके नम्बर इस प्रकार हैं। राम नगर एरिया की एमसीकेआर 211 व 213, प्रेम नग

[1/11, 7:54 PM] NIRMAL SANDHU: फोटो समाचार।

अटल भू-जल योजना के तहत करनाल खण्ड़ के भिन्न-भिन्न गांवो से एकत्र किया जा रहा डाटा, योजना के तहत जिला के सभी गांवो को करेंगे कवर।

जल संरक्षण के लिए सूक्ष्म सिंचाई योजना, फव्वारा सिंचाई, कृषि विविधिकरण और भू-जल पुनर्भरण पर भी दे रहे जोर-उपायुक्त निशांत कुमार यादव।

हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा के साथ वी.सी. में उपायुक्त ने दी जानकारी।

करनाल 11 जनवरी, भूमिगत जल के अत्याधिक दोहन को रोकने और उपलब्ध पानी का सदुपयोग करने के मकसद से प्रदेश के भिन्न-भिन्न खण्ड़ों में लागू अटल भू-जल योजना के तहत करनाल खण्ड़ में, सिंचाई विभाग की ओर से जिला जल योजना को लेकर काफी काम किया जा रहा है। मंगलवार को उपायुक्त एवं जिला जल योजना के लिए गठित कमेटी के पीठासीन अधिकारी निशांत कुमार यादव ने, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की अध्यक्ष केशनी आनंद अरोड़ा की विडियो कॉन्फ्रैंस (वी.सी.) में यह जानकारी दी।

उपायुक्त ने बताया कि अटल भू-जल योजना, प्रदेश के 36 खण्ड़ों में लागू की गई थी, जिनमें अधिकतर रेड जोन के हैं। करनाल खण्ड़ भी इनमें से एक है। इस खण्ड़ के 41 गांवो में इस योजना पर डाटा एकत्रिकरण का काम चल रहा है। किस तरह का डाटा एकत्र कर रहे हैं, इस बारे उन्होंने बताया कि प्राधिकरण की ओर से प्रेषित टैम्लेट यानि रूपरेखा के अनुसार गांवो में पानी की कितनी उपलब्धता है, उसके प्रयोग की कितनी जरूरत है, किसान कौन-कौन सी फसलें उगाते हैं जिनमें पानी का प्रयोग होता है, पीने का कितना पानी उपयोग में लिया जाता है और उद्योगों को कितने पानी की जरूरत है, जैसी जानकारी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा उपरोक्त गांवो में से 20 गांव का वाटर सिक्योरिटी प्लान तैयार कर उसे हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण को सब्मिट भी कर दिया है, जबकि 10 गांवो का प्लान प्रक्रियाधीन चल रहा है।

उन्होंने वी.सी. में मौजूद चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा को बताया कि अब वाटर सिक्योरिटी प्लान को पूरे जिला का बनाएंगे, इसमें डाटा बेस पर ही काम होगा। इसके साथ-साथ जल संरक्षण के लिए सूक्ष्म सिंचाई योजना, फव्वारा सिंचाई, कृषि विविधिकरण और भू-जल पुनर्भरण पर भी जोर दिया जाएगा। जैसे ही एकत्र डाटा प्राधिकरण को जाएगा, तो उससे भविष्य की जल संरक्षण योजनाएं काफी कारगर बन सकेंगी।

भूमिगत वाटर टेबल की वर्ष-दर-वर्ष गिरावट की दी जानकारी- उपायुक्त ने बताया कि करनाल एक कृषि प्रधान जिला है, यहां का 80 प्रतिशत भूमिगत जल कृषि में प्रयोग होता है। कुछ वर्ष पहले हरित क्रांति के दौरान भी भूमिगत जल का काफी दोहन हुआ और उसके बाद सबमर्सिबल (गहरे नलकूप) से भी जमीन के नीचे से काफी पानी निकाला गया। उन्होंने सिंचाई विभाग के ग्राउण्ड वाटर सेल के डाटा के आधार पर बताया कि वर्ष 1974 में जिला में वाटर टेबल 5.35 मीटर थी, जो वर्ष 2008 में औसतन 8.57 मीटर तक पहुंच गई। इसके बाद वर्ष 2021 में यह 21.43 मीटर तक जा चुकी है। यदि इसके संरक्षण पर जोर नहीं दिया गया, तो भविष्य में गम्भीर जल संकट हो सकता है। लेकिन अब सरकार की नीतियां और जिला प्रशासन के प्रयासों से कृषि विविधिकरण और सूक्ष्म सिंचाई पर काफी जोर दिया जा रहा है।

उद्योगों को जल संसाधन प्राधिकरण से अनिवार्य है एन.ओ.सी. लेनी- वी.सी. में प्राधिकरण की चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा ने बताया कि सभी उद्योगों को चाहे उन्होंने पूर्व में केन्द्रीय जल बोर्ड से एन.ओ.सी. ले भी रखी है, अब सभी को हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण से एन.ओ.सी. अनिवार्य रूप से लेनी होगी। यह ऑनलाईन प्रक्रिया है और इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता, पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर एन.ओ.सी. का काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि कोई भी ेऐसा भवन जो 100 वर्ग मीटर से ज्यादा एरिया में हो, उसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टर की व्यवस्था करना भी जरूरी किया गया है। इस पर उपायुक्त ने बताया कि शीघ्र ही जिला की इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की मीटिंग बुलाएंगे और उन्हें एन.ओ.सी. लेने बारे कहा जाएगा।

भू-जल की उपलब्धता कम, मांग ज्यादा- प्राधिकरण की चेयरपर्सन ने बताया कि प्रदेश में भूमिगत जल की जितनी उपलब्धता है, मांग उससे कहीं ज्यादा है। कई सालों से इसका अत्याधिक दोहन हो रहा है। अगले कुछ सालों के बाद हालात ज्यादा खराब हो सकते हैं। उद्योगों को छोड़कर अन्य क्षेत्रो में इसका दोहन ज्यादा हुआ है। अकेले कृषि की बात करें, तो 85 प्रतिशत जल कृषि में ही प्रयोग हो रहा है। इसका एक कारण यह भी है कि प्रदेश में भूमिगत जल मीठा है।

आई.ई.सी. गतिविधियों पर दें जोर- चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा ने बताया कि जल संरक्षण के लिए गांव-गांव में सूचना, शिक्षा और संचार की गतिविधियां चलाई जाएं। इस पर उपायुक्त ने बताया कि करनाल जिला में सिंचाई विभाग के माध्यम से आई.ई.सी. गतिविधियों पर काफी जोर दिया जा रहा है।

वी.सी. में सिंचाई विभाग हरियाणा के प्रमुख अभियंता व हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण के सी.ई.ओ. डॉ. सतबीर कादियान, एडीसी करनाल योगेश कुमार, अधीक्षण अभियंता संजय राहड़, सिंचाई विभाग करनाल के कार्यकारी अभियंता नवतेज सिंह, सिंचाई विभाग के तकनीकी अधिकारी डॉ. महावीर सिंह तथा अटल भू-जल योजना के हाईड्रोलोजिस्ट बलराम शर्मा भी मौजूद रहे।